जिसने शक वाले दिन रोजा रखा उसने अबुल कासिम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नाफरमानी की। (शक)से मुराद 30 शाबान हे बादल की वजह से 29 शाबान को चांद नजर नहीं आया तो कोई शख़्स ये समझ कर रोजा रख ले के पता नहीं ये शाबान का 30 वा दिन हे या रमज़ान का 1,कहीं ये रमज़ान ही न हो। इस तरह शक वाले दिन रोजा रखना सही नहीं हे।
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